Jagannath Ji Vrat Katha In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा)


Jagannath Ji Vrat Katha In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा)

देश भर में पूजे जाने वाले, भगवान जगन्नाथ अपने पिछले सभी अवतारों के गुणों के साथ भगवान विष्णु के अवतार हैं। यही कारण है कि उन्हें बहुत मजबूत और शक्तिशाली माना जाता है।

भगवान जगन्नाथ यह है कि उन्हें अक्सर विभिन्न अवसरों पर भगवान कृष्ण, नरसिंह और भगवान विष्णु के रूप में पूजा जाता है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर पुरी, उड़ीसा में स्थित है और यही कारण है कि जगन्नाथ यात्रा उड़ीसा में बहुत बड़े पैमाने पर उत्साह और खुशी के साथ मनाई जाती है।

इस लेख में हम जगन्नाथ जी व्रत और Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) के बारे में जानेंगे।

When to do Jagannath Ji Vrat and Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी व्रत और जगन्नाथ जी की व्रत कथा कब करनी चाहिए)?

यह व्रत को तिसुआ सोमवार के व्रत के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र मास के सभी सोमवार को यह व्रत किया जाता है जाता है। यह व्रत उन्हीं लोगों के घरों में किया जाता है जिनके घर का कोई भी सदस्य श्री जगन्नाथ धाम की यात्रा कर आ चुका हो। इस व्रत में टेसु के पुष्प से पूजा की जाती है। इसलिए इस व्रत को तिसुआ सोमवार व्रत भी कहते हैं।

Jagannath Ji Vrat Katha Vidhi In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा विधि)

आषाढ़ मास की शुरुआत में भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है। इस महीने में भगवान जगन्नाथ यात्रा का भी आयोजन किया जाता है। व्रत चैत्र मास में किया जाता है। आप निम्न प्रकार से जगन्नाथ जी व्रत और Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) कर सकते हैं:

  • व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना होता है।
  • भगवान जगन्नाथ को फूलों का हार चढ़ाएं और घी का दीया जलाकर भगवान की पूजा करें।
  • दोनों हाथ जोड़कर शपथ लें और भगवान जगन्नाथ जी की आरती और Jagannath Ji Vrat Katha(जगन्नाथ जी की व्रत कथा) करें.
  • जब तक आप अपना उपवास नहीं तोड़ते तब तक आपको अनाज खाने की अनुमति नहीं है। बस शाम तक फलाहार जरूर खाएं।
  • इस व्रत और Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) को करने से पहले व्यक्ति को अपने मन की शुद्धि करनी चाहिए।
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Jagannath Ji Vrat Katha In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा)

Benefits of Jagannath Ji Vrat and Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी व्रत और जगन्नाथ जी की व्रत कथा के लाभ)

ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ की शुद्ध मन से पूजा, जगन्नाथ जी व्रत और Jagannath Ji Vrat Katha (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और किसी महत्वपूर्ण कार्य के रास्ते में आने वाली किसी भी तरह की बाधा को आसानी से दूर किया जा सकता है।

Jagannath Ji Vrat Katha In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) 1

एक कर्मा बाई नाम की महिला थी वह महिला जगन्नाथ पुरी की भक्ति में खोई रहती थी। वह महिला सुबह उठकर बिना नहाए धोए जगन्नाथ भगवान के लिए खिचड़ी बनाती थी और अपने हाथों से जगन्नाथ भगवान को खिचड़ी खिलाती थी।

यह प्रक्रिया वह प्रतिदिन दोहराती थी। सुबह उठकर सबसे पहले जगन्नाथ भगवान के लिए खिचड़ी बनाती और उनको खिलाती। इस तरह से उसका जीवन कट रहा था।

एक समय की बात है कि एक बार एक साधु महाराज उसके घर पर पधारें और कर्मा बाई से कहने लगे कि हम भूखे हैं हमें भोजन कराओ तुम्हारी सारी इच्छाएं पूरी होंगी। कर्मा बाई ने सोचा कि साधु महाराज हमारे द्वार पर पधारे हैं उनको भोजन अवश्य कराना चाहिए।

कर्मा बाई ने साधु महाराज को अंदर बुलाया और उनको भोजन कराने लगी थी। कर्मा बाई ने साधु महाराज को भोजन कराने के बाद साधु महाराज को रात में विश्राम करने के लिए रोक लिया था।

सुबह जब कर्मा बाई बिना नहाए धोए जगन्नाथ भगवान के लिए खिचड़ी बना रही थी तब खिचड़ी बनाने के बाद उस साधु ने कर्मा बाई से पूछा कि ये खिचड़ी किसके लिए बना रही हो तो कर्मा बाई ने कहा कि यह खिचड़ी में जगन्नाथ भगवान के लिए बना रही हूं।

साधु ने कहा कि तुम ऐसा मत करो बिना नहाए धोए भगवान के लिए भोजन बनाना अच्छी बात नहीं है। साधु ने कहा तुम अपने नियम बदलो, मैं तुम्हें बताता हूं वैसा ही करना सुबह उठकर स्नान करके पूजा पाठ करके भगवान जगन्नाथ जी का भोजन बनाना।

दूसरे दिन कर्मा बाई ने साधु महाराज की बात को मानकर ऐसा ही किया लेकिन नियमों के हिसाब से चलते हुए कर्मा बाई को खिचड़ी बनाने में देरी हो गई थी। दोपहर के खाने के समय कर्मा बाई ने जगन्नाथ पुरी भगवान को खिचड़ी खिलाई थी और जब जगन्नाथ पुरी भगवान खिचड़ी खा ही रहे थे तब उनका दोपहर के भोजन का समय हो गया था।

वह खिचड़ी खाने के बाद बिना पानी पिए मंदिर में चले गए थे। जब भक्तों ने देखा, पंडित जी ने देखा कि जगन्नाथ भगवान के मुंह पर खिचड़ी लग रही है तो लोगों ने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की।

जगन्नाथ भगवान ने पूरी कहानी बताई और साधु ने जब पूरी कहानी सुनी तो साधु को बड़ा दुख हुआ। वह साधु कर्मा बाई के पास पहुंचा और कर्मा बाई से क्षमा मांगी। इस तरह से आज भी जगन्नाथ पुरी मंदिर में जगन्नाथ भगवान के लिए सुबह बाल अवस्था में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।

Jagannath Ji Vrat Katha In Hindi (जगन्नाथ जी की व्रत कथा) 2

चैत्र मास में आने वाले चारों सोमवार को तिसुआ सोमवार कहा जाता है। इन सोमवार को भगवान श्री जगन्नाथ की उपासना की जाती है। पहले सोमवार को गुड़ से, दूसरे सोमवार को गुड़ और धनिया से, तीसरे सोमवार को पंचामृत से तथा चौथे सोमवार को कच्‍चा पक्‍का, हर तरह का पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है।

इसके पश्चात पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन चारों सोमवार पर श्रद्धा के साथ व्रत रखने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि सुदामा ने सबसे पहले भगवान श्री जगन्नाथ का पूजन किया था। पूजन के लिए सुदामाजी जगन्नाथ धाम गए। रास्ते में कई पीड़ितों को आश्वासन दिया कि भगवान श्री जगन्नाथ के दरबार में उनके सुख के लिए मन्नत मांगेंगे।

बताया जाता है सुदामा की श्रद्धा देखकर भगवान जगन्नाथपुरी के बाहर एक ब्राह्मण के भेष में खड़े हो गए। सुदामा ने ब्राह्मण से जगन्नाथ धाम का पता पूछा तो भगवान ने बताया कि उनके पीछे जो आग का गोला है उसमें प्रवेश करने के बाद ही भगवान के दर्शन होंगे।

सुदामा आग के गोले में प्रविष्ट होने के लिए बढ़े तो भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। सुदामा ने रास्ते में मिले सभी पीड़ितों के दुख दूर करने की प्रार्थना की तो भगवान जगन्नाथ ने उन्हें एक बेंत देकर कहा कि जिसे यह बेंत मारोगे उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

मान्यता है कि तब से चैत्र मास शुक्ल पक्ष शुरू होने पर श्रद्धालु भक्तिपूर्वक सोमवार को भगवान जगन्नाथ का पूजन-अर्चन करते हैं और उनके बेंत खाकर अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

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