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गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha): भगवान गणेश के अद्भुत चरित्र की गाथा

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha)

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हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूज्य देवता माना जाता है। वे विद्या, बुद्धि, और सभी प्रकार की विघ्नों को हरने वाले के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध हैं और गणेश चतुर्थी जैसे पर्वों पर उनकी पूजा की जाती है।

व्रत के उद्यापन के लिए गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) इस लेख में नीचे दी गयी है। आप गई गयी विषय सूची से चुन कर इस कथा को सीधे पढ़ सकते हैं।

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) में उनके जीवन के अद्वितीय और मनोरंजन करने वाले पहलुओं को जानकर हम उनकी महिमा को और भी समझ सकते हैं।

भगवान गणेश की उत्पत्ति की कथा (Ganesh Ji Ki Katha)

भगवान गणेश के प्रतिष्ठित हाथी के सिर की उत्पत्ति की एक दिलचस्प कथा है।

इसमें देवी पार्वती द्वारा गणेश जी का निर्माण, भगवान शिव द्वारा उनका सिर काटना और फिर एक हाथी के बच्चे के सिर का उपयोग करके उनके सिर को फिर से स्थापित करना शामिल है।

ऐसी कहानी है कि जब माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं तो उन्होंने स्नानगृह के द्वार पर पहरा देने के लिए अपनी मंत्र शक्ति से गणेश को पुत्र रूप में उत्पन्न किया।

इतने में शिव जी वहां आये। जब गणेश ने देवी पार्वती के स्नानगृह में शिव जी के प्रवेश का विरोध किया तो क्रोध में भगवान शिव ने गणेश का सिर काट दिया।

अपने बेटे की मृत्यु का एहसास होने पर, देवी पार्वती क्रोधित हो उठीं और तब तक शांत नहीं हुई जब तक कि गणेश का जीवन बहाल नहीं हो जाता।

भगवान शिव ने भगवान विष्णु और ब्रह्मा से इस विषय पर मदद मांगी। एक हाथी के बच्चे का सिर लाया गया और भगवान शिव ने इसे गणेश जी के धड़ पर रखकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।

भगवान गणेश जी और बूढ़ी महिला की कथा (Ganesh Ji Ki Katha)

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक दयालु बूढ़ी महिला अपने बेटे और उसकी पत्नी के साथ रहती थी। वह बहुत धार्मिक थी और हर दिन भगवान गणेश से प्रार्थना करती थी। वह शुद्ध हृदय वाली एक साधारण महिला थी, और भगवान गणेश के प्रति उसकी भक्ति गहरी और अटूट थी।

एक दिन, भगवान गणेश सपने में बुढ़िया को दिखाई दिए। वह उसकी भक्ति से प्रसन्न थे और उसे पुरस्कृत करना चाहते थे। भगवान गणेश ने उससे कहा, “देवी, मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हारी एक इच्छा पूरी करूंगा। तुम क्या चाहती हो?”

बूढ़ी महिला ने काफी देर तक सोचा। उसका जीवन साधारण था, और उसे किसी चीज़ की ज्यादा जरूरत नहीं थी। लेकिन वह अपने परिवार और अपने गांव के लिए कुछ अच्छा करना चाहती थी।

अंत में, उसने कहा, “भगवान गणेश, मैं अपने पोते को सोने के कटोरे से दूध पीते हुए देखना चाहती हूँ।”

भगवान गणेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारी इच्छा पूरी हुई।”

अगले दिन, बूढ़ी महिला का बेटा सोने के कटोरे में भरा दूध लेकर घर आया। उसने वह अपने बेटे को दिया और छोटे बच्चे ने खुशी-खुशी वह दूध पी लिया।

बूढ़ी महिला बहुत खुश थी। उसने भगवान गणेश को उसकी इच्छा पूरी करने के लिए धन्यवाद दिया।

लेकिन भगवान गणेश की लीला अभी समाप्त नहीं हुई थी। वह फिर से सपने में बूढ़ी महिला को दिखाई दिए और बोले, “देवी, मैं तुम्हारी बुद्धि से बहुत प्रभावित हूँ। तुमने मुझसे एक साधारण सी इच्छा ही मांगी है, लेकिन वास्तव में, तुमने सब कुछ माँग लिया है। तुम चाहती थीं कि तुम्हारा पोता स्वस्थ, धनी और खुश रहे। मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी है। तुम्हारा पोता एक लंबा और समृद्ध जीवन व्यतीत करेगा।”

बूढ़ी महिला भगवान गणेश की बहुत आभारी थी। वह सपने से उठी और उसे शांति और संतोष का अनुभव हुआ। वह जानती थी कि उसके पोते का ध्यान गणेश जी द्वारा रखा जाएगा।

बूढ़ी महिला के बेटा और उसकी पत्नी भी बहुत खुश थे। वे जानते थे कि भगवान गणेश ने उनके बच्चे को विशेष आशीर्वाद दिया है।

उन्होंने अपने बेटे को प्यार और देखभाल के साथ पाला, और वह एक दयालु और करुणामय व्यक्ति के रूप में बड़ा हुआ। वह बहुत बुद्धिमान और सफल भी था।

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha)
गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha)

बूढ़ी महिला ने अपने पोते को बड़े गर्व के साथ बड़ा होते देखा। वह भगवान गणेश की बहुत आभारी थी कि उन्होंने उसकी इच्छा पूरी की। वह जानती थी कि उसके पोते की यह सफलता भगवान गणेश के आशीर्वाद के कारण है।

एक दिन, बूढ़ी महिला बीमार पड़ गई। वह जानती थी कि पृथ्वी पर उसका समय समाप्त हो रहा है।

उसने अपने बेटे और उसकी पत्नी को अपने पास बुलाया और कहा, “मेरे प्यारे बच्चों, मैं मरने से नहीं डरती। मुझे पता है कि मैं भगवान गणेश के साथ रहने जा रही हूँ। लेकिन जाने से पहले मैं तुम्हें एक आखिरी सलाह देना चाहती हूँ।”

बूढ़ी महिला के बेटे और उसकी पत्नी उसकी सलाह सुनने के लिए उत्सुक थे। वे जानते थे कि वह एक बुद्धिमान महिला हैं, और उनके शब्द मूल्यवान होंगे।

बूढ़ी महिला ने कहा, “मेरे बच्चों, हमेशा दूसरों के प्रति दयालु और करुणामय रहो। जरूरतमंद लोगों की मदद करो और हमेशा भगवान गणेश से सबके अच्छे की प्रार्थना करना, ऐसा याद रखो।

वह सभी बाधाओं को दूर करने वाले और शुभ लाभ प्रदान करने वाले हैं।

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) का महातम्य

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) हमें उनके अद्वितीय गुणों के बारे में सिखाती है और हमें यह याद दिलाती है कि वे बुद्धि, प्रतिभा, और विवेक के प्रतीक हैं।

उनके प्रिय भक्त बनने के लिए हमें उनके प्रति आत्म समर्पण के भाव से भक्ति करनी चाहिए और उनके प्रति हमारे मन में श्रद्धा भाव बढ़ना चाहिए।

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निष्कर्ष

गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) हमें उनके व्यक्तिगत और आदर्श जीवन के पहलुओं को जानने का मौका देती है और हमें उनके प्रति अपनी भक्ति और समर्पण की भावना बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।

गणेश जी अपने भक्तों पर अवश्य ही कृपा करते हैं। गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) हमारे जीवन में ज्ञान, प्रतिभा, और आदर्श व्यवहार की महत्वपूर्ण शिक्षा प्रदान करती है।

हम आशा करते हैं आपको यह गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) पसंद आयी होगी। भगवन गणेश आपका कल्याण करें।

जय श्री गणेश !

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