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शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra): भगवान शिव की महामहिमा

शिव महिम्न स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) Shiv Panchakshar Stotra

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~ जय महादेव ~

इस लेख में शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) संस्कृत भाषा में दिया गया है। आप निचे दी गयी विषय सूचि से सीधे इसे चुन कर पढ़ सकते हैं।

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) भगवान शिव के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले सभी स्तोत्रों में सबसे लोकप्रिय माना जाता है।

इस स्तोत्र की रचना की परिस्थितियों के बारे में किंवदंती इस प्रकार है;

एक बार चित्ररथ नाम का एक राजा था। राजा ने एक शानदार बगीचा बनवाया था, जिसमें अत्यंत सुंदर फूल खिलते थे। इन फूलों का उपयोग राजा रोज़ाना भगवान शिव की पूजा करने के लिए किया करते थे।

एक दिन, पुष्पदंत नामक गंधर्व ने इन सुंदर फूलों की ओर मोहित होकर उन्हें चुराने का निश्चय किया, जिसके परिणामस्वरूप राजा चित्ररथ के पास भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं बचे।

राजा ने चोर को पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन सब व्यर्थ हो गया क्योंकि गंधर्वों के पास अदृश्य रहने की दिव्य शक्ति थी।

अंत में राजा ने शिव निर्माल्य को अपने बगीचे में फैला दिया। शिव निर्माल्य में बिल्व पत्र, फूल आदि होते हैं जिनका उपयोग भगवान शिव की पूजा में किया जाता है। शिव निर्माल्य को पवित्र माना जाता है।

पुष्पदंत, यह नहीं जानते हुए, शिव निर्माल्य पर चला गया, और इससे उसने अदृश्यता की दिव्य शक्ति खो दी।

फिर पुष्पदंत ने भगवान शिव से क्षमा के लिए प्रार्थना की। इस प्रार्थना में उन्होंने प्रभु की महानता को गाया।

यही प्रार्थना ‘शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)‘ के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस स्तोत्र से भगवान शिव प्रसन्न हुए, और पुष्पदंत की दिव्य शक्तियों को वापस कर दिया।

किंवदंती का कुछ आधार है, क्योंकि स्तोत्रम के श्लोक संख्या 38 में लेखक के नाम का उल्लेख है।

इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी है, और उन्नीसवीं शताब्दी के प्रसिद्ध संतों में से एक श्री रामकृष्ण ने इस स्तोत्र के कुछ श्लोकों का पाठ करके ही समाधि प्राप्त की।

भगवान शिव, हिन्दू धर्म में महादेव, त्रिमूर्ति के एक प्रमुख रूप हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु, और शिव के रूप में त्रिमूर्ति का तीसरा अंश कहा जाता है।

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra), जिसे महिम्न: शिव स्तोत्र भी कहा जाता है, भगवान शिव की महामहिमा और अद्वितीयता को गाता है।

इस लेख में, हम इस अद्वितीय स्तोत्र का महत्व और भगवान शिव की महिमा को जानेंगे। शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) पाठ आपके लिए भी लाभकारी हो!

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का महत्व

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” का पाठ श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की अमावस्या को सही माना जाता है, जब भगवान शिव की पूजा की जाती है।

यह स्तोत्र भगवान शिव के महत्वपूर्ण गुणों, कल्याणकारी रूप, और भक्तों के जीवन में शिव की कृपा के प्रतीक के रूप में है।

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” का पाठ करने पर भगवान शिव के आशीर्वाद से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि प्राप्त होती है।

इसका पाठ करने से भक्त अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं, चाहे वो धन, स्वास्थ्य, या मानसिक शांति की बात ही क्यों न हो।

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) के गौण महत्व

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” में भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया गया है और इससे हमें उनकी विशेषता और आध्यात्मिक महत्व का ज्ञान होता है।

इस स्तोत्र के पाठ से जीवन में भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण बढ़ता है।

भगवान शिव की महामहिमा

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” में भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया गया है, जिससे हमें उनके अद्वितीय गुणों और विशेषताओं का अधिक ज्ञान मिलता है।

इससे हमें यह भी पता चलता है कि वे जीवों के मालिक हैं और सभी जीवों का कल्याण करते हैं।

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का आध्यात्मिक महत्व

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” का पाठ करने से भक्त भगवान शिव के आध्यात्मिक महत्व को समझते हैं। वे जानते हैं कि भगवान शिव का जीवन कितना महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है।

इसी तरह भक्त भी अपने जीवन में भगवान के मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं।

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) के लाभ

इस स्तोत्र के पाठ से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं।

यहां हम कुछ मुख्य लाभों को देखेंगे:

आत्म-प्रज्ञाता

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” के पाठ से भक्त अपनी आत्मा को और अधिक समझते हैं और उनकी आत्म-प्रज्ञाता में वृद्धि होती है। यह उन्हें अपने आध्यात्मिक मार्ग पर एक कदम आगे बढ़ने में मदद करता है।

मानसिक शांति

“शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” का पाठ करने से मानसिक चिंताओं और तनाव से मुक्ति मिलती है। यह भक्त को शांति और सुख की अनुभूति कराता है।

कष्टों का समाधान

इस स्तोत्र के पाठ से कष्टों का समाधान होता है और भक्त अपने जीवन की समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं। यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए आदर्श है।

शिव महिम्न: स्तोत्र के अन्य लाभ (More Benefits of Shiv Mahimna Stotra)

शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का पाठ करने के अन्य मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • जो कोई भी शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का पाठ करता है, वह शिव की पूजा में आनंदित होता है।
  • यह डर पर काबू पाने में मदद करता है।
  • जो कोई भी इस शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का पाठ करता है उसे भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
  • जो कोई भी इस शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra) का पाठ करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

सम्पूर्ण शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)

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इस महत्वपूर्ण लेख को भी पढ़ें – Shani Stotra (शनि स्तोत्र)

निष्कर्ष

शिव महिम्न: स्तोत्र” भगवान शिव की महामहिमा और आध्यात्मिक महत्व को बताने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसके पाठ से भक्त अपने जीवन में आध्यात्मिक विकास, मानसिक शांति, और समृद्धि प्राप्त करते हैं।

यदि आप भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण को बढ़ाना चाहते हैं, तो “शिव महिम्न: स्तोत्र (Shiv Mahimna Stotra)” का नियमित रूप से पाठ करना एक अच्छा कदम हो सकता है।

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