षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi)


षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) हिंदू धर्म में एक पवित्र दिन माना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह दिन जनवरी या फरवरी के महीने में आता है।

इस दिन व्रत करने से और अन्न तथा तिल का दान करने से घर में धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है। षटतिला एकादशी को व्रत करने से परिवार समृद्ध तथा सुखी बनता है।

तिल का इस दिन अधिक से अधिक प्रयोग करने और तिल का दान करने के कारण इस दिन को षटतिला एकादशी कहा जाता है।

हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग इस दिन उपवास रखते हैं और सुख, समृद्धि तथा धन-धान्य में बढ़ोतरी के लिए भगवान श्री विष्णु जी की पूजा करते हैं। यह दिन विशेष रूप से विष्णु जी के भक्त वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है।

षटतिला एकादशी के दिन छः तरह से तिल का उपयोग किया जाता है इसलिए इसे षटतिला का नाम दिया गया है। इस दिन तिल का उपयोग इन छः तरीकों से किया जाता है:

  • तिल स्नान
  • तिल की उबटन
  • तिलोदक
  • तिल का हवन
  • तिल का भोजन
  • तिल का दान

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इस लेख में हम षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat), षटतिला एकादशी व्रत विधि (Shattila Ekadashi Vrat Vidhi) और षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) के बारे में जानेंगे।

षटतिला एकादशी व्रत और षटतिला एकादशी व्रत कथा कब करनी चाहिए? (When to do Shattila Ekadashi Vrat and Shattila Ekadashi Vrat Katha?)

षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) और षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) ईश्वर से सुख प्राप्ति और आध्यात्मिक सफाई के बारे में है।

यह दिन भगवान विष्णु जी को समर्पित है। हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र चरण के दो अलग-अलग चरण होते हैं – कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। प्रत्येक चरण (पक्ष) 14 दिनों का होता है। इन दोनों पक्षों को ही हिन्दू कैलेंडर माह के पक्ष भी कहा जाता है।

दोनों पक्षों के ग्यारहवें दिन को एकादशी कहा जाता है। इसलिए एक माह में दो एकादशी के दिन आते हैं। इस दिन रखे जाने वाले व्रत या कर्मकांड को एकादशी व्रत कहा जाता है और दुनिया भर में लाखों हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है।

माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस दिन ही षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) तथा षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) रखनी चाहिए।

षटतिला एकादशी व्रत एक दिन पहले सूर्यास्त से शुरू होकर एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के बाद तक रखा जाता है।

षटतिला एकादशी व्रत कथा विधि (Shattila Ekadashi Vrat Katha Vidhi In Hindi)

षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) और षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) की पूजा विधि इस प्रकार है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
  • भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
  • अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
  • व्रत कथा का पाठ करें। (व्रत कथा इस लेख में निचे दी गयी है। कृपया कर के व्रत कथा वहां से पढ़ें।)
  • भगवान की आरती करें। (इस लेख के अंत में एकादशी आरती के लेख का लिंक दिया गया है। उस पर क्लिक कर के आप एकादशी आरती पढ़ सकते हैं।)
  • भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
  • इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें।
  • इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें और सात्विक भोजन करें। बहुत से लोग व्रत के दौरान फलाहार ग्रहण करते हैं और कुछ लोग कुछ भी खाना ग्रहण नहीं करते। यहाँ तक की पानी भी ग्रहण नहीं करते। परन्तु आप व्रत के दौरान फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।
  • इस दिन अन्न और तिल का दान करने से सर्वश्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए ऐसा ज़रूर करें।
  • इस दिन तिल का उपयोग इन छः तरीकों से करना चाहिए – तिल स्नान, तिल की उबटन, तिलोदक, तिल का हवन, तिल का भोजन और तिल का दान।
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षटतिला एकादशी व्रत और षटतिला एकादशी व्रत कथा के लाभ (Benefits of Shattila Ekadashi Vrat and Shattila Ekadashi Vrat Katha)

षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) और षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) का लाभ उन लोगों के लिए है जो भगवान विष्णु की आस्था और पूजा करते हैं।

इसे हिंदू धर्म में सबसे फलदायी व्रतों में से एक माना जाता है। एकादशी व्रत के लाभ आपको शांति, सद्भाव और समृद्धि ला सकते हैं। इस पवित्र हिंदू अनुष्ठान के भक्त, मन की शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं।

षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) और षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) सुख, समृद्धि तथा धन-धान्य में बढ़ोतरी की इच्छा के लिए अति योग्य माना जाता है।

जो मनुष्य इस महत्त्वपूर्ण षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha) को पढ़ता या सुनता है उसे अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

एक बार की बात है। मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहा करती थी। वह हमेशा समय-समय पर व्रत किया करती थी। एक बार वह ऐसे ही एक माह तक व्रत करती रही।

इसी तरह एक माह तक व्रत करने के कारण उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया। ब्राह्मणी ने व्रत तो पूर्ण कर लिया परन्तु उसने देवताओं तथा ब्राह्मणों के निमित्त अन्नादि का दान नहीं किया। वह हमेशा ऐसा ही करती थी और दान देने से बचा करती थी।

भगवान श्री विष्णु जी ने जब यह देखा तो उन्होंने कहा कि ब्राह्मणी अपना व्रत पूर्ण कर के स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्ति के योग्य तो हो गयी है परन्तु दान न करने के कारण उसे स्वर्ग लोक में तृप्ति नहीं मिलेगी।

यह कहकर भगवान श्री विष्णु जी ने ब्राह्मणी का उद्धार करने के लिए एक भिक्षु का रूप धारण किया और ब्राह्मणी के घर भिक्षा मांगने के लिए चले गए।

भिक्षु को अपने द्वार खड़ा देखकर ब्राह्मणी ने भिक्षु को मिट्टी का पिंड दिया। यह प्राप्त कर के भगवान वापस वैकुण्ठ लोक आ गए। ऐसे ही समय बीतता गया और एक दिन ब्राह्मणी की मृत्यु हो गयी और उसने अपने शरीर का त्याग कर दिया।

शरीर का त्याग करने के बाद ब्राह्मणी को मिट्टी के पिंड का दान करने के प्रभाव से स्वर्ग लोक में एक आम के वृक्ष के साथ घर की प्राप्ति हुई। परन्तु ब्राह्मणी ने घर को अन्य वस्तुओं से खाली पाया।

घबराकर ब्राह्मणी ने भगवान श्री विष्णु जी की प्रार्थना की और कहा – “हे प्रभु! मैंने अनेक व्रत किए और आपका पूजन किया परन्तु फिर भी मेरा घर वस्तुओं से खाली है, इसका क्या कारण है?”

श्री विष्णु जी ने कहा – “तुम अपने घर में जाओ और कुछ समय बाद तुम्हारे घर पर देव कन्याएं आएंगी। तब तुम उनसे षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) का महत्त्व और इस व्रत का विधान पूछना।”

श्री विष्णु जी की बात सुन कर वह अपने घर चली गयी। जब देव कन्याएं आईं तो ब्राह्मणी ने उनसे पूछा कि आप मुझे षटतिला एकादशी का महत्त्व बताएं।”

तब उनमें से एक देव कन्या ने षटतिला एकादशी का महत्त्व बता दिया। उस ब्राह्मणी ने भी देव कन्याओं के कहे अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया और उसके प्रभाव से उसका घर धन-धान्य से भर गया।

इस से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्यों को अज्ञान का त्याग कर के षटतिला एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस एकादशी का व्रत करने वाले को जन्म-जन्म की निरोगता प्राप्त हो जाती है। इस व्रत के लाभ से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

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