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Saraswati Aarti Lyrics (सरस्वती आरती)

Saraswati Vrat Katha In Hindi (सरस्वती व्रत कथा) Basanat Panchami (बसंत पंचमी) Saraswati Aarti Lyrics (सरस्वती आरती)

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Saraswati Aarti Lyrics (सरस्वती आरती)

जैसे ही सर्दियां फीकी पड़ जाती हैं, खिलती वसंत ऋतु हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार सबसे शुभ त्योहारों में से एक का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। बसंत पंचमी को देश के पूर्वी भाग में सरस्वती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है और दक्षिणी क्षेत्र की ओर इसे श्री पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

भक्तों का मानना है कि भगवान ब्रह्मा की पत्नी देवी सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, रचनात्मकता और विचारों की पवित्रता लाकर दुनिया को एक बेहतर जगह मिलती है। इसके अलावा, यह शुभ दिन सरसों की फसलों के साथ-साथ फूलों के पकने और खिलने से जुड़ा है और यही एक कारण है कि सरसों की फसलें मौसम के दौरान मोहक दिखती हैं।

ऐसा माना जाता है कि पीला रंग देवी सरस्वती का पसंदीदा है और यही कारण है कि इस दिन व्यंजनों, परिधानों और हर चीज की सजावट पीले रंग की होती है।

सरस्वती व्रत कथा के बाद Saraswati Aarti (सरस्वती आरती) करनी चाइये।

Benefits of Saraswati Aarti (सरस्वती आरती के लाभ)

सरस्वती व्रत, Saraswati Vrat Katha (सरस्वती व्रत कथा) और Saraswati Aarti (सरस्वती आरती) के लाभ इस प्रकार हैं:

  • यह पूजा करियर और शिक्षा से जुड़ी सभी बाधाओं को दूर करती है।
  • यह करियर और शिक्षा में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह किसी को अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने में सहायता करता है।
  • व्यक्ति को दिव्य वाणी की शक्ति प्रदान करता है।
इस महत्वपूर्ण लेख को भी पढ़ें - Saraswati Vrat Katha In Hindi (सरस्वती व्रत कथा) | Basant Panchami (बसंत पंचमी)
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Saraswati Aarti Lyrics (सरस्वती आरती)

|| सरस्वती जी की आरती ||

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता…॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय सरस्वती माता…॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय सरस्वती माता…॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय सरस्वती माता…॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥ जय सरस्वती माता…॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥ जय सरस्वती माता…॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥ जय सरस्वती माता…॥

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

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