रथ सप्तमी (Rath Saptami) के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी


रथ सप्तमी (Rath Saptami) के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी

रथ सप्तमी (Rath Saptami) सूर्य देव को समर्पित त्योहार है। पूरे भारतवर्ष में हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग रथ सप्तमी को अपने घरों तथा मंदिरों में हर्षोल्लास से मनाते हैं।

रथ सप्तमी का त्योहार किसानों के लिए नई खुशियां लेकर आता है क्यूंकि अधिकांश भारतीय किसान इस दिन से वर्ष की शुरुआत मानते हैं। यह समय किसानों के लिए फसल की कटाई का समय होता है।

रथ सप्तमी बसंत ऋतु के दौरान मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार मौसम के परिवर्तन तथा फसलों की कटाई के मौसम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

बसंत ऋतु में बसंत पंचमी का त्योहार भी मनाया जाता है। अगर आप बसंत पंचमी के बारे में विस्तार से जानकारी चाहते हैं तो निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए। इस विषय पर लेख विस्तारपूर्वक लिखा गया है।

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तो इस लेख में हम रथ सप्तमी (Rath Saptami) के बारे में जानेंगे और साथ ही जानेंगे रथ सप्तमी से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में।

रथ सप्तमी क्या है? (What Is Rath Saptami?)

अगर आपने सूर्य देव जी की प्रतीकात्मक छवि देखी होगी तो आप पाएंगे कि सूर्य देव जी अपने रथ पर विराजमान हैं और उनके रथ को 7 घोड़े खींच रहे हैं और घोड़ों की लगाम सूर्य देव जी के सारथी के हाथों में है। यह सात घोड़े 7 रंग के प्रकाश को दर्शाते हैं।

रथ सप्तमी (Rath Saptami) सूर्य देव को समर्पित एक हिन्दू त्योहार है। रथ सप्तमी प्रतीकात्मक रूप से सूर्य देव का अपने सात घोड़ों वाले रथ को उत्तरी गोलार्ध की ओर मोड़ने का समय है। उत्तरी गोलार्ध का मतलब उत्तर पूर्वीय दिशा की ओर से है।

यह दिन सूर्य देव जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहते हैं। रथ सप्तमी (Rath Saptami) को शिशिर ऋतु के बाद बसंत ऋतु के शुरू होने के साथ साथ फसलों की कटाई की शुरुआत के लिए मनाया जाता है।

रथ सप्तमी (Rath Saptami) के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी

रथ सप्तमी से जुड़ी कथा क्या है? (What is a legend related to Rath Saptami?)

रथ सप्तमी (Rath Saptami) के त्योहार से जुड़ी हुई पौराणिक कथा यह है कि जब सूर्य देव को शरीर रूप में जन्म लेना था तो उनके जन्म के लिए बहुत विचार किया गया क्यूंकि सूर्य देव के जन्म के लिए ऐसी माँ की कोख की आवश्यकता थी जो सूर्य देव का अद्भुत तेज सहन कर सके।

इसलिए ऋषि कश्यप की पत्नी अदिति का चयन इस कार्य के लिए किया गया क्यूंकि उस समय केवल वही एकमात्र स्त्री पृथ्वी पर मौजूद थीं जो सूर्य देव को अपनी कोख में पाल सकती थीं। बाद में सूर्य देव जी ने ऋषि कश्यप और माता अदिति के घर जन्म लिया।

जिस दिन सूर्य देव जी का जन्म हुआ उस दिन को रथ सप्तमी (Rath Saptami) कहा जाता है।

एक और कथा इस प्रकार है कि कम्बोज साम्राज्य के राजा यशोवर्मा के कोई पुत्र नहीं था। इस बात से राजा बहुत दुखी थे। उन्हें अपने राज्य में शासन करने के लिए भविष्य में एक उत्तराधिकारी की आवश्यकता थी।

ईश्वर की भक्ति करने पर उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन उनका पुत्र स्वस्थ नहीं रहता था। राजा के द्वार पर एक दिन एक संत पधारे और उन्होंने राजा को बताया कि उनका पुत्र पिछले जन्म में किए गए पापों के कारण अस्वस्थ रहता है।

संत ने राजा को सलाह दी कि उन्हें पुत्र को पिछले जन्म के पापों से छुटकारा दिलवाने के लिए रथ सप्तमी (Rath Saptami) पूजा करनी चाहिए। राजा ने संत की आज्ञा का पालन किया और देखते ही देखते राजा का पुत्र स्वस्थ हो गया और बाद में बड़े हो कर राजा के पुत्र ने सफलतापूर्वक अपने राज्य पर शासन किया।

इस वजह से राज्य में रथ सप्तमी (Rath Saptami) को महत्वपूर्ण रूप से मनाया जाने लगा।

रथ सप्तमी किस दिन है? (On which day is Rath Saptami?)

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रथ सप्तमी (Rath Saptami) इस वर्ष 7 फरवरी, 2022 के दिन मनाई जाएगी। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार रथ सप्तमी (Rath Saptami) माघ माह की शुक्ल सप्तमी के दिन मनाई जाएगी।

इस दिन को सूर्य देव के जन्मदिन के रूप में पूरे भारतवर्ष में जगह जगह पर मनाया जाता है। इसलिए रथ सप्तमी को सूर्य जयंती भी कहते हैं।

रथ सप्तमी का धार्मिक महत्त्व क्या है? (What is the religious significance of Rath Saptami?)

सूर्य देव को हिन्दू धर्म में विशेष देवताओं में से एक का दर्जा प्राप्त है। इसलिए भारत के कई स्थानों पर विभिन्न सूर्य मंदिर हैं। जैसे कि इस लेख में हम पहले ही जान चुके हैं कि इस दिन को सूर्य देव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसलिए यह दिवस हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

हमने साथ में यह भी जाना कि सूर्य देव के रथ के सात घोड़े प्रकाश के सात रंगों को दर्शाते हैं। और साथ ही में यह सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। सप्ताह की शुरुआत रविवार से होती है। इसलिए रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है।

भगवान सूर्य के रथ में 12 पहिए होते हैं जो कि 12 राशियों और 12 महीनों को दर्शाते हैं। रथ सप्तमी (Rath Saptami) का उत्सव सूर्य देव की दिव्य ऊर्जा और तेज के साथ उनका परोपकार प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है।

रथ सप्तमी (Rath Saptami) भारत के सभी सूर्य मंदिरों में मनाई जाती है। इन सब में कोणार्क सूर्य मंदिर सुप्रसिद्ध है जो कि भारत के उड़ीसा राज्य में स्थित है।

निष्कर्ष

तो इस लेख में हमने रथ सप्तमी (Rath Saptami) के बारे में जाना और साथ ही रथ सप्तमी से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त ​की। आशा करता हूँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा और आपके ज्ञान में इससे वृद्धि हुई होगी। कृपया इस लेख को दूसरों के साथ भी सांझा करें।

खुश रहे, स्वस्थ रह…

जय श्री कृष्ण!

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