आज का पंचांग, आरती, चालीसा, व्रत कथा, स्तोत्र, भजन, मंत्र और हिन्दू धर्म से जुड़े धार्मिक लेखों को सीधा अपने फ़ोन में प्राप्त करें।
इस 👉 टेलीग्राम ग्रुप 👈 से जुड़ें!

Skip to content

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan): भाई-बहन के प्यार का प्रतीक

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan)

आज का पंचांग जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें।
👉 पंचांग

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan), भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भाई-बहन के प्यार और संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

यह पर्व हर साल श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इस दिन बहन अपने भाई के लिए प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक राखी उसके कलाई पर बांधती है।

इस लेख में, हम रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के महत्व, परम्पराओं, और इसके पीछे की कहानी के बारे में विस्तार से जानेंगे।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का महत्व

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) एक प्यार भरा पर्व है जो भाई-बहन के बीच गहरे रिश्तों को दर्शाता है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए खास तौर पर तैयारी करती है। इसके साथ ही, भाई भी अपनी बहन को प्यार से उपहार देते हैं।

इसका महत्व भारतीय परंपरा में गहरा है और यह दिखाता है कि कितना महत्वपूर्ण है एक भाई-बहन का अटूट संबंध और उसे बनाए रखना।

इस दिन भाई अपनी बहन को सुरक्षा और उसके साथ हर बुरी परिस्थिति में साथ खड़े रहने का वचन देता है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के आदर्श

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) एक ऐसा पर्व है जो बहन और भाई के बीच विशेष प्यार और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए भगवन से उसकी लम्बी आयु और रक्षा की प्रार्थना करती है।

इस राखी का महत्व होता है क्योंकि यह भाई-बहन के संबंध को सूरक्षित रखने का प्रतीक होता है। यह एक प्रतिज्ञा का प्रतीक भी हो सकता है कि भाई अपनी बहन की रक्षा करेंगे और उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

इस दिन बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का पालन करने से बहन को विशेष आत्मविश्वास का अहसास होता है क्योंकि वह जानती है कि उसका भाई हमेशा उसके साथ है।

वह अपने भाई के लिए शुभकामनाएं देती है और उसे आशीर्वाद देती है कि वह सफलता पाए और खुश रहे। इसके साथ ही, भाई भी अपनी बहन के प्यार और समर्थन के लिए आभारी होते हैं और उन्हें उपहार देते हैं।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के पारंपरिक रूप

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का पारंपरिक रूप भारतीय समाज में गहरी नींवों पर आधारित है और यह पर्व बहनों और भाइयों के लिए विशेष महत्व रखता है।

इसे श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाने का पर्व माना जाता है, जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। इसके साथ ही, भाई अपनी बहन को उपहार और आशीर्वाद देते हैं।

इस दिन का महत्व भारतीय समाज में बहुत उच्च है और लोग इसे बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। बच्चे अपने भाई-बहन के साथ खुशियों से खेलते हैं।

रक्षा बंधन कब मनाया जायेगा (Raksha Bandhan 2023 Date)?

2023 में रक्षा बंधन पर्व खास तिथि पर आ रहा है (Raksha Bandhan 2023 Date) – बुधवार, 30 अगस्त को, जो सावन मास की पूर्णिमा का दिन है।

पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर, अगले दिन, 31 अगस्त 2023 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक चलेगी।

इस रक्षा बंधन के दिन सुनफा योग, बुधादित्य योग, आयुष्यमान योग और वासी योग भी होगा, जो इस दिन को और भी खास बनाएगे।

30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 19 मिनट से पंचक आरम्भ होगा। सुबह 10 बजकर 59 मिनट से रात 9 बजकर 02 मिनट तक भद्रा का समय होगा।

भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं माना गया है, और इसका मतलब है कि आपको राखी बांधने के लिए सही समय का चयन करना होगा।

इस वर्ष (Raksha Bandhan 2023 Date), रक्षाबंधन के लिए सबसे शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 2 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक है, यानी भद्राकाल के समाप्त होने के बाद।

इस खास दिन पर, बहनें अपने भाइयों की सुरक्षा के लिए राखी बांधती हैं और भाई भी अपनी बहनों की सुरक्षा का वचन देते हैं। राखी बांधते समय, बहनें भगवान गणेश को पहले पूजती हैं, जिससे अशुभ योगों का प्रभाव खत्म हो जाता है।

अगर आपके भाई दूर हैं, तो आप विशेष रूप से इस पर्व के महत्व को मानते हुए भगवान गणेश या श्रीकृष्ण की मूर्ति को राखी बांध सकती हैं।

इससे आप अपने भाई के लम्बे और सुखमय जीवन की कामना करती हैं और उनके स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।

यह एक मानसिक और भावनात्मक संबंध का परिचय करता है, जो भाई-बहन के बीच विशेष होता है, और इसे रक्षाबंधन के पर्व के माध्यम से मनाया जाता है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) की कहानी

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) की कहानी भारतीय परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण है और यह दिखाती है कि इस पर्व का महत्व इतना क्यों है।

कहानी के अनुसार, एक समय की बात है, वह समय जब भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में एक छोटी सी चोट आई और खून बहने लगा।

जब द्रौपदी ने यह देखा, तो उन्होंने तुरंत अपने वस्त्र से छोटा सा कपडा फाड़ कर उसे भगवान श्रीकृष्ण के हाथ पर बाँध दिया।

इस साहसी कदम से द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ एक अत्यधिक मूल्यवान भाई-बहन के प्रेम का बंधन बनाया।

कुछ समय बाद, एक दिन भरी राज सभा में दुर्योधन के भाई दुशासन ने द्रौपदी के चीर हरण का प्रयास किया। वह उस विशाल सभा में द्रौपदी के पल्लू को खींचने का प्रयास कर रहा था।

इस संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण ने ऐसी महिमा की कि दुशासन द्रौपदी के पल्लू को खींचता-खींचता थक गया लेकिन द्रौपदी को निर्वस्त्र नहीं कर पाया।

इस घटना ने दिखाया कि द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण के बीच एक अद्वितीय भाई-बहन के प्रेम का बंधन हुआ था। इसी दिन को याद करते हुए, लोग श्रावण पूर्णिमा को भाई-बहन के प्यार का प्रतीक मानने लगे और रक्षाबंधन का पर्व मनाने लगे।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan)

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के त्योहार का आयोजन

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उनके अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, और समृद्धि की कामना करती हैं।

इसके साथ ही, भाई भी अपनी बहन को उपहार देते हैं और आशीर्वाद के साथ उनकी खुशियों की कामना करते हैं। इस दिन के अवसर पर परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं।

रंग-बिरंगे वस्त्र पहने जाते हैंऔर साथ ही मिठाईयों का स्वाद भी लिया जाता है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के माध्यम से सामाजिक संदेश

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी देता है।

यह दिखाता है कि परिवार के सदस्यों के बीच संबंध कितने महत्वपूर्ण होते हैं और हमें एक-दूसरे के साथ सदैव समर्पित रहना चाहिए।

इसके साथ ही, यह हमें बहनों के साथ समानता की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाता है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का उपहार और आशीर्वाद

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के त्योहार पर उपहार देना और आशीर्वाद देना भी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। बहन अपने भाई को विशेष उपहार देती हैं, जैसे कि राखी, वस्त्र, और मिठाई।

वे अपने भाई के लिए शुभकामनाएं देती हैं कि वे सदैव सफल हों और खुश रहें। भाई भी अपनी बहन को उपहार देते हैं और उन्हें अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, और समृद्धि की कामना करते हैं।

यह एक परम्परागत रूप से मनाया जाने वाला त्यौहार है जो परिवार के सदस्यों के बीच प्यार और समर्थन की भावना को प्रकट करता है।

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के अन्य पहलू

रक्षा बंधन के और भी कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। यह एक साथ आने का मौका प्रदान करता है, जिसमें परिवार के सदस्य एक-दूसरे के साथ समय बिता सकते हैं।

यह सामाजिक समृद्धि को प्रोत्साहन देता है और आपस में सौहार्दय बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हमें हमारे परिवार के साथ प्रेम बंधन और समर्थन का महत्व याद दिलाता है।

इसके माध्यम से हम अपने भाई-बहन के साथ प्यार की भावना को मजबूती से बढ़ाते हैं और एक दूसरे के साथ खुशियों से रहते हैं।

इस महत्वपूर्ण लेख को भी पढ़ें – श्रवण नक्षत्र (Shravana Nakshatra): संपन्नता और कल्याण की ओर

निष्कर्ष

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम बंधन को मजबूती से बनाए रखते हैं और एक दूसरे के साथ खुशियों से रहते हैं।

यह हमारे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी प्रदान करता है कि हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहना चाहिए।

इस त्योहार के माध्यम से हम अपने प्यारे भाई-बहन के साथ विशेष प्यार और समर्थन की भावना को मजबूती से जीवन में अपनाते हैं।

इस तरह, रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) हमारे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हमारे पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को मजबूती से बनाए रखता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page