मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर), श्रीशैलम


मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) भगवान शिव जी को समर्पित सुप्रसिद्ध मंदिर है। यह भगवान शिव के 12 मुख्य ज्योतिर्लिंगों में से एक भी है। ज्योतिर्लिंग भगवान शिव जी की आध्यात्मिक छवि है जिसे पूरे भारतवर्ष में हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा पूजा जाता है।

भगवान शिव जी के ज्योतिर्लिंगों के बारे में जानने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिये क्यूंकि इसके बारे में लेख विस्तार से लिखा गया है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) में देवी पारवती को “मल्लिका” के रूप में और भगवान शिव को “अर्जुन” के रूप में (कृपया महाभारत का अर्जुन न समझें) पूजा जाता है।

यह मंदिर मुख्य रूप से शैव तथा शाक्त संप्रदाय के भक्तों में प्रसिद्ध है परन्तु हिन्दू धर्म में मानने वाले सभी श्रद्धालु यहाँ पर भगवान के दर्शन करने के लिए पूरी दुनिया और पूरे भारत से आते हैं।

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) भारत के किस राज्य में स्थित है?

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में स्थित एक भव्य मंदिर है। यह कुर्नूल जिले के श्रीशैलम कस्बे में स्थित है। श्रीशैलम की दूरी कुर्नूल शहर से लगभग 180 किलोमीटर है।

भगवान शिव और माँ शक्ति से सम्बंधित होने के कारण यह मंदिर एक ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों है। इसलिए यह स्थल शैव और शाक्त संप्रदाय के भक्तों में सुप्रसिद्ध है।

श्रीशैलम एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल भी है। अगर आप यहाँ आते हैं तो नागार्जुन सागर श्रीशैलम बाघ अभ्यारण्य ज़रूर घूमने जाएँ। यह अभ्यारण्य भारत का सबसे बड़ा बाघ अभ्यारण्य है। आप पास के नल्लमला जंगलों में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं।

पास के अन्य पर्यटक स्थलों में अक्का महादेवी गुफाएं भी आकर्षण का केंद्र हैं।

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) की वास्तुकला शैली कैसी है?

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) का निर्माण द्रविड़ वास्तुकला शैली द्वारा किया गया है। मंदिर के 4 मुख्या द्वार हैं जिन्हें गोपुरम कहा जाता है और यह मंदिर 2 हेक्टेयर में फैली विशाल भूमि पर निर्मित है।

मंदिर का मुख पूर्व दिशा की और स्थित है। इस विशाल परिसर में बहुत सारे अन्य मंदिर भी हैं परन्तु मल्लिकार्जुन और भ्रमराम्बा दो मुख्य मंदिर हैं।

विजयनगर काल में बनाया गया मुख मंडप मंदिर में सबसे प्रसिद्ध परिसर है। यही मुख मंडप परिसर मंदिर के गर्भगृह तक जाने का मुख्य मार्ग है। मुख मंडप में आप बहुत ही खूबसूरती से तराशे हुए स्तम्भ देख पाएंगे।

ऐसा माना जाता है कि जिस मंदिर में मल्लिकार्जुन कि मूर्ती स्थापित की गयी है उस मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में किया गया था। इस प्रकार यह मंदिर पूरे मंदिर परिसर में सबसे प्राचीन है।

मान्यता है कि यहाँ पर भगवान राम जी ने सहस्त्र लिंगों (1000 शिव लिंग) की स्थापना की थी और अन्य पांच शिवलिंग पांडवों द्वारा स्थापित किए गए थे।

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर), श्रीशैलम

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) का धार्मिक महत्त्व क्या है?

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) का धार्मिक महत्त्व आप इस बात से जान सकते हैं कि इस स्थान को भगवान शिव जी के मुख्य 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। साथ में यह स्थान शक्तिपीठ भी है।

इस वजह से यह स्थान भगवान शिव के भक्तों और माँ शक्ति (पारवती माँ) के भक्तों में अति लोकप्रिय है। यह मंदिर भगवान शिव के 275 पादल पत्र स्थलों में से एक है।

यहाँ बहती हुई कृष्णा नदी को पाताल गंगा भी कहा जाता है। नदी तक 852 सीढ़ियां हैं। इस नदी के पानी से शिवलिंग को नहलाया जाता है।

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) में दर्शन का समय क्या है?

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) में भगवान शिव जी और माँ शक्ति के दर्शन का समय सुबह लगभग 5:30 से शाम लगभग 9:30 तक होता है। इसलिए अपने समयनुसार आप मल्लिकार्जुन के दर्शन करने जा सकते हैं। यह मंदिर आंध्र प्रदेश सरकार प्रशासन के अधीन आता है। दर्शन का समय मंदिर प्रशासन के द्वारा समय समय पर बदला भी जा सकता है।

कृपया कर के निचे दी गयी मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) की आधिकारिक वेबसाइट से ज़रूर जांचें।

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) की आधिकारिक वेबसाइट

मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) कैसे पहुंचा जा सकता है?

जैसा कि इस लेख में पहले भी बताया गया है श्रीशैलम और कुर्नूल जिला मुख्यालय में लगभग 180 किलोमीटर का फासला है और हैदराबाद से श्रीशैलम लगभग 210 किलोमीटर के करीब है।

नज़दीकी रेलवे स्टेशन मरकापुर और तरलापड़ु है। दोनों ही जगहों से श्रीशैलम लगभग २ घंटे की दूरी पर है। आप रेल मार्ग से इन जगहों पर आसानी से पहुँच सकते हैं। यहाँ से फिर आप सड़क मार्ग से होकर श्रीशैलम पहुँच सकते हैं।

नज़दीकी हवाई अड्डा कुर्नूल में स्थित है। यहाँ से आप रेल मार्ग से मरकापुर या तरलापड़ु पहुंच सकते हैं और फिर सड़क मार्ग से श्रीशैलम पहुँच सकते हैं। या फिर आप सीधे कुर्नूल से श्रीशैलम सड़क मार्ग द्वारा पहुँच सकते हैं।

निष्कर्ष

तो इस लेख में हमने मल्लिकार्जुन मंदिर (श्रीशैलम मंदिर) के बारे में जाना और साथ ही मंदिर से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। आशा करता हूँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा और आपके ज्ञान में इससे वृद्धि हुई होगी। कृपया इस लेख को दूसरों के साथ भी सांझा करें।

खुश रहे, स्वस्थ रह…

जय श्री कृष्ण!

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