Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) In Hindi


Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) In Hindi

देवी महालक्ष्मी भगवान विष्णु की दिव्य पत्नी हैं, और धन की देवी हैं। जो इनकी पूजा करता है, उसे धन की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, देवी लक्ष्मी समुंद्र मंथन के दौरान समुद्र से निकलीं, और भगवान विष्णु को अपने आदर्श पति के रूप में चुना।

देवी महालक्ष्मी भी उनके कई अवतारों या अवतारों में भगवान विष्णु के साथ थीं। सीता और राधा की तरह, जब भगवान विष्णु ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के अवतार में जन्म लिया।

देवी महालक्ष्मी की छवि हमेशा चार हाथों की होती है, कमल पर बैठी या खड़ी होती है। उन्हें एक अत्यंत सुंदर देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जिसके दो दिव्य हाथों में कमल के फूल या कलश हैं और अन्य दो आशीर्वाद की मुद्रा में सोने के सिक्कों के रूप में भाग्य प्रदान करते हैं। उल्लू देवी महालक्ष्मी का वाहन है।

इस लेख में हम Mahalaxmi Vrat और Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) के बारे में जानेंगे।

When to do Mahalaxmi Vrat and Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत और महालक्ष्मी व्रत कथा कब करनी चाहिए)?

हिंदू धर्म में गजलक्ष्मी व्रत यानि महालक्ष्मी व्रत और Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) का विशेष महत्व है। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन से यह व्रत शुरू होता है और 16 दिन तक यह व्रत किया जाता है।

इस व्रत में मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस व्रत को करने से सुख – समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। इस व्रत से जुड़ी कई तरह की लोककथाएं हैं लेकिन कुछ कथाएं काफी प्रचलित हैं।

Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) In Hindi

Mahalaxmi Vrat Katha Vidhi In Hindi (महालक्ष्मी व्रत कथा विधि)

Mahalaxmi Vrat और Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) की पूजा विधि इस प्रकार है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा स्थल को साफ कर लें।
  • ये एक दिन का उपवास है इसलिए इसके लिए संकल्प लें।
  • एक मंच पर महालक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
  • श्रीयंत्र को मूर्ति के पास रखा जाता है।
  • मूर्ति के सामने जल से भरा कलश रखा जाता है, ये समृद्धि का प्रतीक है।
  • देवी को फूल, फल और नैवेद्य चढ़ाएं।
  • घी का दीपक और धूप जलाएं।
  • कथा, भजन का पाठ करें और प्रार्थना करें।
  • अंत में देवी को प्रसन्न करने के लिए आरती की जाती है।
  • शाम को पूजा के बाद व्रत का समापन होता है।
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Benefits of Mahalaxmi Vrat and Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत और महालक्ष्मी व्रत कथा के लाभ)

महालक्ष्मी व्रत और Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) का पाठ हिंदू पुरुषों और महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उपवास दिवस है। इस पवित्र व्रत की महिमा भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव भाइयों में सबसे बड़े राजा युधिष्ठिर को बताई थी। महालक्ष्मी व्रत की महानता ‘भविष्य पुराण’ जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी वर्णित है।

महालक्ष्मी व्रत देवी लक्ष्मी के सम्मान में मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु की पत्नी हैं और उन्हें मां शक्ति का एक रूप भी माना जाता है। पवित्र व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है जिसे राधा अष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है, जो देवी राधा (भगवान कृष्ण की साथी) का जन्मदिन है।

यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दूर्वा अष्टमी से मेल खाता है जिसमें दूर्वा घास की पूजा की जाती है। इसके अलावा उसी दिन को ‘ज्येष्ठा देवी पूजा’ के रूप में भी मनाया जाता है और तीन दिनों तक जारी रहता है। महालक्ष्मी व्रत और Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) का पाठ करने वाले को जीवन भर देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) In Hindi (1)

एक बार भगवान विष्णु मृत्युलोक यानि भूलोक में गमन करने के लिये निकल पड़े। माता लक्ष्मी ने भी निवेदन किया कि वह भी उनके साथ आना चाहती हैं। भगवान विष्णु उनके स्वभाव से परिचित थे इसलिये पहले ही उन्हें आगाह किया कि मैं आपको एक ही शर्त पर साथ लेकर चल सकता हूं। माता लक्ष्मी मन ही मन बहुत खुश हुई कि चलो सशर्त ही सही भगवन साथ ले जाने के लिये तो माने।

माता फटाक से बोली मुझे सारी शर्तें मंजूर हैं। भगवान विष्णु ने कहा जो मैं कहूं जैसा मैं कहूं आपको वैसा ही करना होगा। माता बोली ठीक है आप जैसा कहेंगें मैं वैसा ही करूंगी। दोनों भू लोक पर आकर विचरण करने लगे। एक जगह रुककर श्री हरि ने माता से कहा कि मैं दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा हूं। आपको यहीं पर मेरा इंतजार करना होगा।

यह कहकर भगवान विष्णु दक्षिण दिशा की तरफ बढ़ गये। अब माता को जिज्ञासा हुई कि दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है जो भगवान मुझे वहां नहीं ले जाना चाहते। माता का स्वभाव तो वैसे भी चंचल ही माना जाता है। उनसे वहां पर ज्यादा देर नहीं रुका गया और वे भगवान विष्णु की तरफ ही बढ़ने लगी। आगे जाकर माता को सरसों का खेत दिखाई दिया। उसकी सुंदरता ने माता का मन मोह लिया। वे फूलों को तोड़कर अपना श्रृंगार करने लगीं।

इसके बाद वे कुछ ही दूर आगे बढ़ी थी कि गन्ने के खेत उन्हें दिखाई दिये। उन्हें गन्ना चूसने की इच्छा हुई तो गन्ने तोड़कर उन्हें चूसने लगी कि भगवान विष्णु वापस आ गए। सरसों के फूलों से सजी माता लक्ष्मी को गन्ना चूसते हुए देखकर भगवान विष्णु उन पर क्रोधित हो गये। भगवान ने कहा कि आपने शर्त का उल्लंघन किया है।

मैनें आपको वहां रूकने के लिये कहा था लेकिन आप नहीं रूकी और यहां किसान के खेतों से फूल व गन्ने तोड़कर आपने अपराध किया है। इसकी आपको सजा मिलेगी। भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को 12 वर्ष तक किसान की सेवा करने का शाप दे दिया और स्वंय क्षीरसागर गमन कर गये।

अब विवश माता लक्ष्मी को किसान के घर रहना पड़ा। एक दिन माता लक्ष्मी ने किसान की पत्नी को देवी लक्ष्मी की प्रतिमा की पूजा करने को कहा और बोला कि इससे तुम जो भी मांगोगी तुम्हें मिलेगा। कृषक की पत्नी ने वैसा ही किया। कुछ ही दिनों में उनका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। हंसी खुशी समृद्धि में 12 साल का समय बीत गया।

जब भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को लेने के लिये आये तो किसान ने माता को न जाने देने का हठ किया। इस पर माता लक्ष्मी ने कहा कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की तेरस की दिन यदि वह विधिपूर्वक मेरी पूजा करे तो वह उसके घर से नहीं जाएंगी। लेकिन वह इस दौरान उन्हें दिखाई नहीं देंगी। वह एक कलश की स्थापना करे और उसमें कुछ धन रखे यानि धन ही लक्ष्मी का रूप होगा।

इस प्रकार तेरस के दिन किसान ने माता के बताये अनुसार ही पूजा कर कलश स्थापना की और किसान का घर धन-धान्य से पूर्ण रहने लगा। तब से लेकर आज तक धनतेरस पर माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा भी चली आ रही है।


Mahalaxmi Vrat Katha (महालक्ष्मी व्रत कथा) In Hindi (2)

प्राचीन काल में एक बार एक गांव में गरीब ब्राह्मण रहता था। वह भगवान विष्णु का परमभक्त था। एक दिन उसकी भक्ति से खुश होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और मनचाहा वरदान मांगने को कहा। ब्राह्मण ने कहा कि उसके घर में हमेशा लक्ष्मी का वास हो।

इस इच्छा को जानने के बाद विष्णुजी ने कहा कि उसे लक्ष्मी तो प्राप्त हो सकती है लेकिन उसके लिए उसे थोड़ा प्रयत्न करना होगा। भगवान विष्णु ने कहा कि मंदिर के सामने एक स्त्री रोज आती है और यहां आकर उपले पाथती है, तुम बस अपने घर उन्हें आने का निमंत्रण देना।

वह स्त्री ही देवी मां लक्ष्मी हैं। अगर वह स्त्री तुम्हारे घर आती है तो तुम्हारा घर धन-धान्य से भर जाएगा। इतना कहकर भगवान विष्णु अदृश्य हो गए।

अगले दिन सुबह 4 बजे ब्राह्मण मंदिर के सामने बैठ गया और जब धन की देवी मां लक्ष्मी उपले पाथने आईं तो ब्राह्मण ने उन्हें अपने घर में आने का निवेदन किया। ब्राह्मण के व्यक्तव को सुनकर लक्ष्मी जी समझ गईं कि ये सब विष्णु जी का किया धराया है।

माता लक्ष्मी ने कहा कि तुम 16 दिन तक महालक्ष्मी व्रत को विधि पूर्वक करों और रात-दिन चंद्रमा को अर्घ्य दो तो मैं तुम्हारे घर आऊंगी। देवी के कहे अनुसार ब्राह्मण ने देवी का व्रत एवं पूजन किया और उत्तर की दिशा की ओर मुख करके लक्ष्मीजी को पुकारा।

अपने वचन को पूरा करने के लिए धन की देवी प्रकट हुईं और उन्होंने गरीब ब्राह्मण के हर कष्ट को दूर किया और उसके घर को सुख-संपत्ति से भर दिया।

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