भगवान शिव ने शंखचूड़ (शंखचूर) का वध कैसे किया?


भगवान शिव ने शंखचूड़ (शंखचूर) का वध कैसे किया?

भगवान शिव को “देवों के देव” भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार वह समय – समय पर अपने भक्तों की रक्षा करते रहे हैं। शिवपुराण में भगवान शिव और शंखचूड़ के बिच एक भीषण युद्ध का वर्णन किया गया है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध कैसे किया

लेकिन उस से पहले यह जान लेते हैं कि शंखचूड़ कौन था और भगवन शिव और उसके बिच युद्ध क्यों हुआ?

शंखचूड़ कौन था?

शिवपुराण के अनुसार शंखचूड़ दैत्यराज दम्भ का पुत्र था। शंखचूड़ बहुत ही पराक्रमी असुर राजा था। एक बार को देवता भी उसके कहर से बचने के लिए भगवान विष्णु और भगवान शिव की शरण में गए थे।

कुछ किवदन्तियों की मानें तो शंखचूड़ श्री कृष्ण का पूर्व जन्म का मित्र सुदामा था जिसे गोलोक में श्राप मिलने के कारण दैत्य योनि में जन्म लेना पड़ा था।

शंखचूड़ के जन्म की कथा

बात दैत्यराज दम्भ के समय की है। जब काफी समय के बाद भी दैत्यराज दम्भ को संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो वे बहुत दुखी हो गए और उन्होंने भगवन विष्णु की आराधना व तपस्या की।

अपनी कठोर तपस्या देख कर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और दैत्यराज के सामने प्रकट हुए। भगवान विष्णु ने दैत्यराज दम्भ से कोई भी वरदान मांगने को कहा। दैत्यराज दम्भ ने महा पराक्रमी और तेजस्वी पुत्र की कामना भगवान विष्णु से की।

उन्होंने ऐसे पुत्र का वरदान मांगा जो अजय हो और तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर सके। भगवान विष्णु ने दैत्यराज दम्भ को ऐसा ही वरदान दिया और वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

इसके बाद दम्भ के घर एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम उन्होंने शंखचूड़ रखा।

शंखचूड़ की तपस्या और उसका विवाह

शंखचूड़ बड़ा हुआ और उसने पुष्कर में भगवान ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी शंखचूड़ की तपस्या से खुश होकर वहां प्रकट हुए और शंखचूड़ से वरदान मांगने के लिए कहा।

शंखचूड़ ने ब्रह्मा जी से यह वर मांगा कि वह देवताओं द्वारा कभी भी पराजित न किया जा सके। इस पर ब्रह्मा जी ने शंखचूड़ को वरदान देते हुए “श्री कृष्ण कवच” दिया और तथास्तु कहा। साथ ही ब्रह्मा जी ने शंखचूड़ को धर्मध्वज की पुत्री तुलसी से विवाह करने का मार्गदर्शन दिया और अंतर्ध्यान हो गए।

इसके बाद शंखचूड़ का विवाह धर्मध्वज की पुत्री तुलसी के साथ हुआ और वे दोनों सुखी रूप से अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

शंखचूड़ का अभिमान

ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद शंखचूड़ बहुत अभिमानी हो गया। उसे अपने पराक्रम पर इतना घमंड हो गया कि उसने देवताओं को सताना शुरू कर दिया। देखते ही देखते शंखचूड़ ने तीनों लोकों पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया।

देवता थक हार कर भगवान विष्णु जी के पास गए और उनसे सहायता करने की प्रार्थना की। लेकिन विष्णु जी ने दैत्यराज दम्भ को एक महा पराक्रमी पुत्र होने का वरदान दिया था इसलिए भगवान विष्णु देवताओं की सहायता करने में असमर्थ थे।

भगवान विष्णु ने देवताओं को भगवान शिव के पास जाने की सलाह दी और कहा कि अब महादेव ही आप लोगों की सहायता कर सकते हैं। देवगण भगवान शिव के पास गए और उनसे सहायता करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने देवताओं के ऊपर आई इस विपदा की घडी में उनकी सहायता करने का वचन दिया।

भगवान शिव ने शंखचूड़ (शंखचूर) का वध कैसे किया
भगवान शिव

भगवान शिव और शंखचूड़ का युद्ध

शंखचूड़ भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर के बहुत पराक्रमी और बलशाली हो चूका था। इस वजह से शिव जी भी शंखचूड़ का वध करने में असमर्थ थे। भगवान विष्णु ने एक ब्राह्मण का रूप धारण करके शंखचूड़ से उसका “श्री कृष्ण कवच” दान में ले लिया।

इसके बाद भगवान शिव और शंखचूड़ के बिच बहुत भयंकर युद्ध हुआ और कई दिनों तक यह युद्ध चला।

भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध कैसे किया?

युद्ध के अंत में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से असुर शंखचूड़ को भस्म कर दिया। जैसे भी भगवान शिव ने उसे भस्म किया तो उसकी हड्डियों से शंख का जन्म हुआ।

क्यूंकि शंखचूड़ एक विष्णु भक्त था तो आज भी भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी को शंख से जल चढ़ाया जाता है। और भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध किया था इस वजह से भगवान शिव को शंख से जल चढ़ाना वर्जित है।

निष्कर्ष

तो यह थी कथा भगवान शिव और शंखचूड़ के युद्ध की। इस लेख में हमने जाना कि भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध कैसे किया था? आशा करता हूँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा और आपके ज्ञान में इसे पढ़ कर वृद्धि हुई होगी। कृप्या इसे दूसरों के साथ भी साँझा कीजियेगा।

स्वस्थ रहिय, खुश रहिये…

जय श्री कृष्ण!

भगवान शिव ने अर्जुन की परीक्षाभगवान शिव ने शंखचूड़ (शंखचूर) का वध कैसे किया? – PDF Download


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