भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम कौन से हैं?


भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम कौन से हैं?

भगवान शिव त्रिदेवों में से एक हैं और उन्हें सृष्टि का विध्वंसक भी माना जाता है। भगवान शिव को देवों के देव महादेव भी कहा जाता है। शिव जी सभी देवों में श्रेष्ठ जाने जाते हैं इसीलिए उन्हें “महादेव” कहा जाता है।

हिन्दू धर्म में त्रिदेवों को “पर ब्रह्म” के विस्तार के रूप में दर्शाया गया है। त्रिदेवों का एक अपना – अपना दायित्व है। जैसे कि ब्रह्मा भगवान को सृष्टि के रचयिता, विष्णु भगवान को सृष्टि के संरक्षक तथा भगवान शिव को सृष्टि के विध्वंसक के रूप में माना जाता है।

आपने भी भगवन शिव के ज्योतिर्लिंगों के बारे में सुना होगा। आपके मन में भी शायद कभी यह बात उठी होगी कि इन ज्योतिर्लिंगों के पीछे कि कहानी क्या है? इस लेख में हम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम के बारे में विस्तार से जानेंगे।

लेकिन सबसे पहले भगवान शिव के बारे में जान लिया जाए।

भगवान शिव कौन हैं?

जैसे कि हम पहले ही जान चुके हैं भगवन शिव को त्रिदेवों में सृष्टि के विध्वंस का दायित्व दिया गया है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि भगवान विध्वंस कैसे कर सकते हैं। सबसे पहले आप एक बात जान लीजिए जिस भी चीज़ ने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। उसे कोई नहीं टाल सकता। उसी प्रकार सृष्टि का जब ब्रह्मा भगवन सृजन करते हैं तो सृष्टि का जन्म होता है और एक दिन सृष्टि का विनाश या अंत निश्चित ही है।

भगवान शिव सृष्टि का समय पूरा होने के बाद उसका विनाश करते हैं ताकि फिर से एक बार नयी सृष्टि का सृजन किया जा सके। भगवन शिव को भोले भंडारी के रूप में भी जाना जाता है। उनके भक्त उन्हें भोला इसलिए कहते हैं क्यूंकि वह अपनी भक्ति से बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों का उद्धार करते हैं।

भगवन शिव कि पत्नी माता पारवती हैं। उन्हें प्रकृति माँ के रूप में भी जाना जाता है। दुर्गा माँ भी उन्ही का एक दूसरा रूप हैं।

ज्योतिर्लिंग क्या होता है?

हिन्दू धर्म में ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का एक भक्तिपूर्ण प्रतिनिधित्व करता है। यह शब्द “ज्योति” और “लिंग” के योग से बना है। शिव महापुराण (जिसे शिव पुराण भी कहा जाता है) के अनुसार भारत और नेपाल में कुल 64 मूल ज्योतिर्लिंग मंदिर हैं। जिनमें से 12 सबसे पवित्र हैं और उन्हें महा ज्योतिर्लिंग यानि कि महान ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।

ज्योतिर्लिंग के पीछे की कहानी

अगर हम शिव महापुराण को जानें तो उसके अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच बहस छिड़ गयी। दोनों इस बात पर तर्क करने लग गए कि सृष्टि में सबसे सर्वोच्च कौन है।

बहस जब ज़्यादा ही बढ़ गयी तो बहस को सुलझाने के लिए भगवान शिव ने प्रकाश के एक विशाल अनंत स्तंभ के रूप में अपने आप को प्रकट किया। देखते ही देखते यह प्रकाश पुंज तीनों लोकों के आर पार हो गया।

इस प्रकाश पुंज से एक आवाज़ आई कि भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा में से सर्व प्रथम जो इस प्रकाश पुंज के किसी भी छोर को जान जाएगा वही दोनों में सर्व श्रेष्ठ होगा। दोनों ने दोनों दिशाओं में प्रकाश के अंत को खोजने के लिए क्रमशः नीचे और ऊपर की ओर अपना रास्ता विभाजित किया।

bhagwan shiv ke jyotirlingon ke naam

जब अनंत काल तक खोजने पर ब्रह्मा जी को इस प्रकाश पुंज का छोर नहीं मिला तो ब्रह्मा जी ने वापस आकर के झूठ बोला कि उन्होंने अंत का पता लगा लिया है जबकि विष्णु जी ने अपनी हार मान ली।

ब्रह्मा जी के इस झूठ ने शिव जी को क्रोधित कर दिया और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि भले ही वे ब्रह्मांड के निर्माता हैं, लेकिन भविष्य में उनकी पूजा नहीं की जाएगी।

माना जाता है कि यह विशाल और प्रकाशित ज्योतिर्लिंग बाद में एक पवित्र पर्वत अन्नामलाई (जिस पर की अरुणाचलेश्वर मंदिर स्थित है) में ठंडा हो गया।

ज्योतिर्लिंग मंदिर ऐसे मंदिर हैं जहां शिव प्रकाश के एक ज्वलंत स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे।

भगवान शिव के 64 ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव के कुल 64 ज्योतिर्लिंग हैं लेकिन 12 ज्योतिर्लिंगों को प्रमुख माना जाता है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंग स्थलों में से प्रत्येक का एक पीठासीन देवता है। प्रत्येक देवता को शिव का ही एक अलग रूप माना जाता है। इन सभी स्थलों पर, भगवन शिव के इस प्रकाश रुपी अनादि और अनंत स्तम्भ कि पूजा कि जाती है।

भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग निम्नलिखित हैं:

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ सभी ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग है और सोमनाथ को पारंपरिक रूप से पहला तीर्थ स्थल माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग तीर्थयात्रा सोमनाथ मंदिर से ही शुरू होती है।

सोमनाथ मंदिर का अपना एक इतिहास रहा है। यह मंदिर अपने 16 बार के विध्वंस का साक्षी है। और इतने बार नष्ट होने के बाद भी आज यह मंदिर जीवित है। यह भगवान शिव की कृपा ही है कि सोमनाथ मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा 16 बार नष्ट होने के बाद भी फिर से बनाया गया।

सोमनाथ मंदिर पश्चिमी भारत में गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटन (सोमनाथ – वेरावल) में स्थित है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन को श्रीशैला भी कहा जाता है। यह आंध्र प्रदेश के रायलसीमा में कुरनूल जिले के एक पहाड़ पर स्थित है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग एक प्राचीन मंदिर में है जो वास्तुशिल्प और मूर्तिकला से समृद्ध है।

मल्लिकार्जुन एक ऐसा स्थान है जहां शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग दोनों एक साथ हैं। यहां पर श्रीआदि शंकराचार्य जी ने अपने भक्ति भजन शिवानंद लहरी की रचना की थी।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर स्वयं महाकाल का घर है। ऐसा माना जाता है कि महाकाल का यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू है। स्वयंभू एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है “स्व-प्रकट” यानी कि “जो स्वयं ही प्रकट हुआ हो”।

स्वयंभू होने के कारण यह ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एकमात्र और अद्वितीय है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर दक्षिण की तरफ मुख वाला एकमात्र ऐसा मंदिर भी है और गर्भगृह (गर्भगृह प्राचीन मंदिर शैली की वो जगह होती है जहाँ भगवान मुख्य रूप से विराजते हैं। जहां शिव लिंग स्थापित होता है।) की छत पर उल्टा श्री रुद्र यंत्र लगा है। यह एक ऐसा स्थान है जहां शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग एक साथ हैं।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर एक शिवपुरी नाम के द्वीप पर स्थित है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा में आता है। इस द्वीप का आकार देवनागरी में “ॐ” के समान दीखता है। इस जगह पर भगवान शिव के दो प्रमुख मंदिर हैं – ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर।

“ओंकारेश्वर” नाम ईश्वर की ओंकार ध्वनि से जुड़ा हुआ है वहीं “ममलेश्वर” नाम ईश्वर की अमरता से जुड़ा हुआ है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य में स्तिथ है। यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो कैलाश पर्वत से निकट है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का घर भी माना जाता है। केदारनाथ चार धामों में से एक है। खूबसूरत बर्फ से ढके हुए महान हिमालय पर्वत पर बसा हुआ केदारनाथ धाम एक प्राचीन तीर्थस्थल है जो कि पौराणिक कथाओं और परंपरा से समृद्ध है।

यह पूरे साल में सिर्फ 6 महीने ही खुला रहता है। बहुत ऊंचाई पर होने के कारण यहाँ पर हर साल भारी मात्रा में बर्फ गिरती है जिसकी वजह से मंदिर के कपाट 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। यह भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में से एक है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर मंदिर भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे से 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित खेड़ तालुका में है। खेड़ तालुका को राजगुरुनगर के नाम से भी जाना जाता है।

शहरी जन – जीवन से दूर यह ज्योतिर्लिंग स्थल किसी स्वर्ग से कम नहीं है। आस पास के घने जंगल कई प्रकार कि वनस्पतियों और जिव जंतुओं के लिए घर हैं।

शहरी जीवन के कोलाहल से दूर, सफेद बादलों से झांकते हुए भीमाशंकर को तीर्थयात्रियों का स्वर्ग कहा जा सकता है। उच्च पर्वतमाला के आसपास के घने जंगल वनस्पतियों और जीवों की दुर्लभ प्रजातियों के लिए निवास स्थान हैं।

सह्याद्री पर्वतमाला के अंतिम छोर पर स्थित यह स्थान स्थानीय नदियों और हिल स्टेशनों के आसपास की दुनिया का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। भीमाशंकर “भीमा” नदी का स्रोत है। यह नदी दक्षिण – पूर्व में बहती है और कृष्णा नदी में जाकर मिल जाती है।

ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव सह्याद्री की राजसी पर्वतमाला पर मौन निगरानी रख रहे हों। ठंडी हवा की खामोश बड़बड़ाहट और पक्षियों के कभी – कभार चहकने से ही आत्मा को शांति मिल जाती है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम कौन से हैं
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर जिसे हम विश्वेश्वर भी कहते हैं में स्थित है। काशी विश्वनाथ को हिन्दू मंदिरों में सबसे पवित्र माना गया है। वाराणसी को हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र स्थल बताया गया है या आप यह भी कह सकते हैं कि वाराणसी हिन्दुओं का सबसे पवित्र शहर है।

वाराणसी भगवान शिव की सबसे प्रिय जगहों में से एक है। यहाँ पर पवित्र गंगा नदी बहती है जिस में हिन्दू लोग किसी के मरने के बाद उसकी अस्थियां विसर्जित करते हैं। यह एक महत्वपूर्ण हिन्दू रीती है। मंदिर गंगा नदी के पश्चिम तट पर स्थित है।

यहां पर भी शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग एक साथ हैं। इस मंदिर में मुख्य देवता को विश्वनाथ या विश्वेश्वर नाम से जाना जाता है जो भगवान शिव का ही एक रूप हैं जिसका अर्थ है “ब्रह्मांड का स्वामी”।

यह मंदिर और शहर 3500 वर्ष पुराना है। इतने प्राचीन इतिहास की वजह से ही इसको दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है जो कि आज भी है। वाराणसी को काशी भी कहा जाता है।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर मंदिर में स्थित है। यह स्थान त्रयम्बकेश्वर तहसील में पड़ता है। गोदावरी नदी की उत्पत्ति त्र्यंबक से होती है। त्र्यम्बक एक छोटा शहर है जहाँ यह ज्योतिर्लिंग स्थित है।

मंदिर परिसर के अंदर एक कुसावर्त कुंड है जो कि एक पवित्र तालाब है। वर्तमान में जो मंदिर है उसका निर्माण पेशवा बालाजी बाजी राव ने करवाया था।

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग भी शिव पुराण में वर्णित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग संभवतः औंधा नागनाथ (महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में) या फिर जगेश्वर (उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में) स्थित है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर को बाबा बैद्यनाथ धाम और बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के झारखंड राज्य के देओघर में स्थित है। इस स्थान में एक मंदिर परिसर है जिसमें बाबा बैद्यनाथ का मुख्य मंदिर है। बैद्यनाथ भगवान शिव का ही एक रूप हैं। यहाँ पर 21 अन्य मंदिर भी हैं।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है। यहाँ का विशाल रामलिंगेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर इस ज्योतिर्लिंग का घर है। यह ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित है।

रामेश्वरम का हिन्दू धर्म में बहुत ही मुख्य स्थान है। यह वही स्थान है जहाँ पर रामायण काल में भगवान राम ने राम सेतु के निर्माण कि नींव रखी थी। यह स्थान समुद्र से सटा हुआ है यानी कि एक तटीय क्षेत्र है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम कौन से हैं
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है। शिव पुराण में इस ज्योतिर्लिंग का वर्णन किया गया है। जिस मंदिर में यह ज्योतिर्लिंग स्थित है उसे ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के नाम से जाना जाता है। ग्रिशनेश्वर का अर्थ होता है “करुणा के स्वामी”। यह भगवान शिव के करुणामयी गुण को दर्शाता है।

यह स्थान “एल्लोरा गुफाओं” से काफी नज़दीक है।

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग

निष्कर्ष

तो यह थी भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम की सूची जिसमें मैंने प्रत्येक ज्योतिर्लिंग के बारे में विस्तार से बताया। आशा करता हूँ आपको मेरा यह लेख अच्छा लगा होगा और आपके ज्ञान में वृद्धि हुई होगी। अगर आपको लगता है कि किसी की जानकारी के लिए यह लेख लाभकारी हो सकता है तो इसे ज़रूर शेयर करें।

स्वस्थ रहें, खुश रहें…

जय श्री कृष्ण!

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